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Tehzeb Hafi -तहज़ीब हाफी

                  Tehzeb Hafi -तहज़ीब हाफी  

मैने जो कुछ भी सोचा हुआ है मैं वो वक़्त आने पर कर जाऊगा 
तुम मुझे ज़हर लगते हो और मै किसी दिन तुम्हे पी कर मर जाऊंगा 




तू तो बीनाई है मेरी तेरी  इलावा मुझे कुछ भी दिखता नहीं 
मैने मुझको अगर तेरे घर उतरा तो मैं कैसे घर जाऊगा 

मैं खला हु खलाओं का निमल बदल खुद खला है तुम्हे क्या पता 
मै तुम्हारी तरह कोई खाली जगह तो नहीं हु जो भर जाऊगा 

 चाहता हु और बहुत चाहता हु तुम्हे खुद भी मालूम है हा 
अगर मुझ से पूछा किसी ने तो मै सीधा मुँह पर मुकर जाऊगा  

उसके चहाने वालो का आज उसकी गली है धरना है 
यही पर रुक जाओ तो ठीक है आगे जाके के मरना है 

 

तुझे भी साथ रखता और उसे भी अपना दीवाना बना लेता 
अगर मै  चाहता तो दिल मै कोई चोर दरवाज़ा बना लेना 
मैं ख्याब पुरे करके खुश हु पर ये पश्तावा नहीं जाता के 
मुस्तक़लिब बनाने से तो अच्छा था की तुझे अपना बना लेता 




       Tehzeb Hafi ke Shayri 


घर मैं भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा 
जाने क्या खौफ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा 

रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है 
जो गले भी नहीं लग रहा है और घर भी नहीं जा रहा 

जिस से एक शख्स पर्दा नहीं रखा जाता 
अब मज़ीद उस ये रिश्ता नहीं रखा जाता
जिस से एक शख्स पर्दा नहीं रखा जाता 
एक तो बस मे नहीं तुझ से मोहब्बत न करू 
और फिर हाथ भी हल्का नहीं रखा जाता  

उस बदन की घाटिया तक नक्श है दिल पर  मेरे 
को सारो से समंदर तक याद है वो दरिया याद है 

उसी ने दुश्मनो को बा खबर रखा हुआ है
 ये तूने जिसे अपना कह के घर रखा हुआ है 
मैं पागल तो नहीं जो उसे तन्खा मागू 
यही काफी है की उसने काम पर रखा  हुए है  

मेरे काँधे पर सर रहने नहीं देगा किसी दिन 
यही जिसने मेरे काँधे पर सर रखा हुआ है 

ये मैने कब कहा के मेरे हक़ है फैसल करे 
अगर वो मुझ से खुश नहीं है तो मुझे जुदा करे 
में उसके साथ जिस तरह गुजारता हु ज़िन्दगी 
उसे तो चाहिए के मेरा शुक्रिया करे 

बना चूका हु मै मौहब्बतों के दर्द की दवा 
अगर किसी को चाहिए तो मुज से राप्त करे