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Ali Zaryoun Shayari in Hindi अली अली ज़रयून शायरी इन हिंदी

                Ali Zaryoun Shayari in Hindi 
                     अली ज़रयून शायरी इन हिंदी  


मैंने उससे प्यार किया है, मिल्कियत का दावा नहीं, 
वो जिसके भी साथ है, मैं उसको भी अपना मानता हूँ 


Ali Zaryoun Shayari in Hindi
Ali zaryoun 



तेरी खुशियों का सबब यार कोई और है ना 
दोस्ती मुझसे है और प्यार कोई और है ना 
तू मेरेअश्क  ना देख और फकत इतना बताओ 
जो तेरे हुस्न पे मरते हैं, बहुत से होंगे पर 
तेरे दिल का तलबगार कोई और? 



पिछली सफों से एक उदासी हुई 
तुलु मेकअप की भीड़ में भी उसी
 पर नज़र गयी 



 इस तरह से ना आजमाओ मुझे उसकी तस्वीर मत दिखाओ 
 मुझे ऐन  मुमकिन है, मैं पलटा हूँ, उसकी आवाज़ में ये बुलाओ 


दोस्तों को ना आग लग जाये अपनी डीपी पे मत लगाओ मुझे, 
मैंने बोला था यार मत आना, झूठ बोला था याद आओ मुझे 


तुम्हारे बाद यह दुख भी तो सहना पड़ रहा है, 
किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है 
मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी 
मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी, 
मुझे अफसोस है ये मुझ को कहना पड़ रहा है 



 मेरी दूरी कहीं उस जिस्म को सेहरा ना कर दे 
अली मुझको ज्यादा तेज़ रहना पड़ रहा है 


 वही लोग हैं और वही शाम है सकी इस कहानी में इलज़ाम है
 सखी तू मेरे बिस्तर एका नहीं? सही तू मेरे दिल का आराम है 

 
 क्यों करूँ काम के नाम पर सकी क्या मोहब्बत कोई काम है 
सकी तेरी चादर सलामत रहे सकी तेरा मजदूर बदनाम है 
और सखी मैं नहीं मैं नहीं हूँ कहीं सखी इश्क है इस इनाम है
 और सखी तुझको अच्छी लगी ये जमीन सकी ये सियाराम 


चादर की इज्जत करता हूँ और परदे को मानता हूँ 
हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ 


सारे मर्द ही एक जैसे हैं तुमने कैसे कह डाला? 
मैं भी तो एक मर्द हूँ तुमको उससे बेहतर मानता हूँ? 



मुझको पता है वो गुस्से में किस हद तक जा सकती है 
अपनी जुबान पर काबू रखो, मैं उसको पहचान ता हूँ 



प्यार में प्यार में जिस्म को यकसर न मिटा जाने दे 
कुर्बतें लम्स को गाली न बना जाने दे जानता हूँ 
कि तुझे कौन सी मजबूरी थी? अब मेरे सामने  तास्वे  ना बहा 



 तू जो हर रोज़ तू जो हर रोज़ नए उस पे 
मर जाता है तू बताएगा मुझे इश्क है क्या? 

                  Ali Zaryoun Poetry, Ghazals & Shayari


चाय पीने ये कहीं बैठ के दोनों भाई जा चुकी है
 ना तो बस छोड़ चलाओ जाने दे और तुरबत एलबम्स 
को गाली लगाना जाने दे हालत जो हमारी हैं 
तुम्हारी तो नहीं है हालत जो हमारी है तुम्हारी
 तो नहीं है ऐसा है तो फिर ये कोई यारी तो नहीं है? 



 तहकीर  ना कल ये मेरी उधड़ी हुई गुदड़ी 
जैसी भी है, अपनी है उधारी तो नहीं? 



 ये तू जो मोहब्बत में सिला मांग रहा है 
ऐसे शख्स तू अंदर से भिखारी तो नहीं है? 



ये तू आपके लिए बहुत ही ताली है
 यार अब बहुत प्यारा सुन रहे हैं यार देख 

 तनहा ही सही लड़कों रही है वो अकेली अरे 
बस थक के गिरी है, अभी हारी तो नहीं है



ये ज़ुल्म मुझसे नहीं हो सका नहीं किया है 
खयाल में भी उसे बे मृदा में एक शख्स को ही 
मान जानता हूँ तो क्या खुदा के नाम पर 
लोगों ने क्या नहीं किया है


पहले-पहल लड़ेंगे तमस्ख़ुर उड़ाएँगे 
जब इश्क़ देख लेंगे तो सर पर बिठाएँगे  


तू तो फिर अपनी जान है तेरा तो ज़िक्र क्यां 
हम तेरे दोस्तों के भी नखरे उठायगे 
ये एहतेमाम  किसी और के ले नहीं 
ताने तुम्हारे नाम के हम पर ही आयगे  

एक फ़क़ीर की शुद आँखो से एक बलोचन हार  गई
जोगन बनके पूछ रही है क्या मर्ज़ी सरकार की है  

क्या क्या अक्लो शक्लो वाले 
आँख उठा कर भी नहीं तकती 
पक्की अपनी यार की है 

मन जिसका मौला होता है वो बिलकुल मुझ सा होता है 
तुम मुझ को अपना कहते हो कह लेने से क्या होता है 

माँ की कब्र पर पहुंचा पिलट के रोने लगा 
देलर बेटा किसी बात पर दुखा हुआ था 

सौ मैने बात बदल दी गले लगा के उसे 
दुरुस्त शख्स गलत बात पर आडा हुआ था 

नीम ख़ामोशी हो तुम सख्त दिलकशी हो तुम 
इस क़द्र मुकम्ल नज़्म किस की शायरी हो तुम  

उसे पता था मे दुनिया नहीं मोह्ब्बत हु 
वो मेरे सामने कुछ भी नहीं छुपाती थी
 ये फूल देख रहे हो ये उसका लहज़ा था 

पुराना दोस्त दुश्मन हो रहा है सौ उसकी ज़र्ब तो कारी रहेगे 
कभी तो काम पड़ना है तुझे भी भला कब तक ये बेकरी रहेगी 

भले जिस कदर आँसू बहा लो 
अदाकारी अदाकारी रहेगी 

अली से दूर रहो लोग उससे कहते थे वो मेरा सच है बहुत चीख कर बताती  थी 
अली ये लोग तुम्हे जानते नहीं अभी गले लगा कर मेरा हौसला बढ़ाती थी 


क़ैस आशिक था कर गया वहशत 
आप शायर है आप क्या करेंगे 

उसे किसी से मोहब्बत थी और मे नहीं था 
ये बात मुझ से ज्यादा उसे रुलाती थी 

 मैं उसके बाद कभी ठीक से नहीं जागा 
वो मुझको  ख्याब नहीं नींद से जगाती थी 

संगज़नी भी जारी कैफियत भी तारी है 
झूट भी झूठा बोलते हो अच्छी दुनियादारी 

सुन्नते औलिया अदा करेंगे 
ज़ख्म खायगे और दुआ करेंगे 

दोस्त दिल फेक मेरे लेकिन 
तू न घबरा तेरी हया करेंगे