Shayari On Ishq - शायरी ऑन इश्क़

 Shayari On Ishq - शायरी ऑन इश्क़ 

हाँथ अगर  थामों  तो ज़िन्दगी भर  साथ  देना,
कुछ पल के  साथी तो जनाज़े में भी मिल  जाते हैं 

Shayari On Ishq 



ले कर हाथों में हाथ क्यों ना 
उम्र भर का हम सौदा कर लें 
 थोड़ी सी मुहब्बत तुम कर लो
 थोड़ी सी मुहब्बत हम कर लें



किन ख्यालों में गुम हो
मेरी नजर से देखो
हर तरफ तुम ही तुम हो
फिज़ाओं में महक़ी है 
तुम्हारी खुशबू
हर साँस में ज़िन्दगी तुम हो
ये वादियाँ कह रही हैं हँसकर
तुम्हीं से है मोहब्बत
मोहब्बत से तुम हो



बस  एक ही झिझक है यही हाल ए दिल
सुनाने में कि तेरा जिक्र भी आएगा
इस फसाने में 



मै शायर हूं मुहब्बत का 
इश्क़ से नज़्म सजाता हूं
कभी पढ़ता हूं मुहब्बत को
 कभी मुहब्बत लिख जाता हूं 



अल्फाजों में ढाल के रख दिया है  दिल
फिर भी पूछते हो  मुहब्बत है या नहीं 



मेरे दिल में तुम, रहने लगे हो
धड़कने बार बार तुम्हारा ज़िक्र करती हैं 


मेरी मोहब्बत की ना सही
 मेरे सलिके की तो दाद दे
रोज़ तेरा ज़िक्र करता हूँ
बगैर तेरा नाम लिये 



रूह में समाए हो तुम इस क़दर 
कोई देखें मुझे तो  नज़र तुम्हीं आते हो 



इतना भी करम उसका कोई कम तो नहीं है
ग़म दे के पूछा उसने कोई ग़म तो नहीं है



शायद कुछ क़र्ज़ चुकाना 
बाक़ी रह गया होगा मेरे हिस्से का 
वरना आज मेरी ख्वाहिशें अधूरी ना होती 



यूँ तो हर एक दिल में दर्द नया होता है
बस बयान करने का अंदाज़ जुदा होता है
कुछ लोग आँखों से दर्द को बहा लेते हैं
और किसी की हँसी में भी दर्द छुपा होता है




कौन कहता है हम उसके
बिना मर जायेंगे
हम तो दरिया है समंदर में
उतर जायेंगे
वो तरस जायेंगे प्यार की एक
बूँद के लिए
हम तो बादल है प्यार के कहीं और
बरस जायेंगे 



मैं तुम्हारी चुप में छुपी हज़ार बात हूँ
होठों की मुस्कान में दबी-दबी हँसी हूँ
कानों में घुलता मद्धम-मद्धम सा सुर हूँ
मैं जो हूँ, जितना हूँ,वो बस तुम हूँ
तुम में हूं



सुर्ख गुलाब सी तुम हो
जिन्दगी के बहाव सी तुम हो
हर कोई पढ़ने को बेकरार
पढ़ने वाली किताब सी तुम हो



इश्क़  का तो ऐसा हिसाब 
 साहब कि बंद हो चुका नंबर भी
डिलीट करने का मन नहीं करता


गजब की तासीर है 
तेरे ओठों की साहिब,
अक्सर बाजारों में 
गुलाब सहमे नजर आए हैं



ये जो फ़िक्र मेरी हो रही है
 इसका दाम बोलिए
अच्छा, याद आई है मेरी
तो फिर काम बोलिए


नब्ज़ क्या ख़ाक बोलेगी हुज़ूर,जो 
दिल पे गुज़री है वो दिल ही जानता है


काश मेरी यादों में तुम
इस कदर उलझ जाओ
इधर हम याद करें
उधर तुम समझ जाओ


हमें एहमियत नहीँ दी गयी 
और हम जान तक दे रहे थे


ख़ुमार- ए-इश्क से बेहतर मिज़ाज भी नहीं कोई..
मर्ज़-ए-मोहब्बत का मगर इलाज भी नहीं कोई!




महक जाऊं मैं तेरे
 इश्क  की खुश्बू से
तुम मुझसे मिलकर
 कोई ऐसी बहार दे


कुबूल हैं मुझे सारी 
नज़र अंदाजिया तेरी
बस शर्त इतनी सी है 
कि तेरे इश़्क में मिलावट ना हो



अपने दिल के रास्ते से तेरे 
यादों को मोड़ रहे है



तुझे बुरा लगता है 
मेरा ह़क़ जताना
चलो आज से हक़
 जताना छोड़ रहे है 



एक आदत सी बन गई हो आप
जिन्दगी आप के संग गुजरे ना गुजरे 
मगर आपको ख्यालों में क्या खूब गुजरती है 



चाहत - ए - इश्क़  बेवजह ही रहने दो 
वजह दे कर कहीं साजिश ना बन जाए



दर्द को भी सजाकर 
पेश करना पड़ता है
यूँ ही नहीं लोग महफ़िलो
 में तालिया बजाते है



कितना मुश्किल है एक शख़्स को ख़ुदा से मांग कर
फिर उसको भूल जाने की दुआ मांगना


आयेंगे याद तुझे 
एक बार फिर से हम
जब तेरे ख़ुद के फैसले 
तुझे  सताने  लगेंगे



दिल उससे न लगाना 
जिसे अपने हुस्न पर गुरूर हो



दिल उससे लगाना जिसे
 मोहब्बत समझने का हुनर हो



जिसके  लिए मैंने 
अपनों को छोड़ा
उसी ने मुझे अपनों
 के लिए छोड़ दिया



पलकों के किनारे हमने भिगोए नहीं
वो समझते रहे की हम रोए नहीं
वो पूछते रहे की किसके ख़यालो में रहते हो
उन्हें कोन बताए कि हम वर्षों से सोए नहीं



ख़ुशी से दिल को आबाद करना
ग़म को दिल से आज़ाद करना
बस इतनी गुज़ारिश है आपसे कि
हो सके तो कभी हमें भी याद जरुर करना



अजीब कशमकश से घिरा हुआ हूं में
सही गलत के फासले में अटका हुआ हूं में
वेसे दिखावटी तो बहुत खुश रहता हूं 
पर अंदर से टूटा हुआ हूं में




गुमसुदा है चाहत मेरी
ना किसी से इकरार है
समंदर छुपा है आंखों में
मगर दरिया से तकरार है,
अकेला हूं इस भीड़ में
भीड़ में लोग हजार है
चेहरों की तो कमी नही
पर रूह की दरकरार है,
चल रहा हूं अनजान राहों में
मंजिल की तलाश में
राहगीरों की कमी नहीं
हमसफ़र की दरकरार है,
सौदागर हूं सपनों का
बाजार की तलाश है
जरूरतमंद हूं उन लम्हो का
जिनके वादे हुए हजार है,
घर बार ना ठौर कोई
उजड़े चमन की बहार हूं
'फ़क़ीर' हूं दीवानेपन का
तभी तो ज़माने से अलगाव है।




एक चीज है जो सबसे
 बड़ी आफत बनी हुई है
हर किसी में तुम्हे ढूंढने 
की आदत बनी हुई है 



महोब्बत और नफ़रत
 सब मिल चुके है मुझे
 मैं अब तक़रीबन
 मुक़म्मल हो चुका हूं



सुनो मुझ से नही होता 
दलीलें दूँ मिसालें दूँ 
मेरी आँखों में लिखा है 
मुझे तुम से मोहब्बत है



मैं रिवायत से थोड़ा पुराना हूं 
इस दौर की हूरों को पसंद नहीं आऊंगा 



आजमा कर हमें हर 
बार छोड़ दिया गया है 
दिल हे या खिलौना हर
बार तोड़ दिया गया है



उसकी झुकी नजरों में भी 
मैंने नाम अपना पढ़ा है 
खामोशी में भी उसकी मैंने 
शोर अपनी चाहतों का सुना हैं



उम्र का कब दिल ख़्याल करता है
इश्क़ तो..बस कमाल करता है
तू तो बस..दिल जवान रख अपना
देख फिर..दिल क्या धमाल करता है



इश्क़ का वास्ता देकर मनवाते हैं 
वो अपनी सारी ज़िद..
हम भी उनकी खुशी के
 लिए खुद का वजूद नहीं देखते 



लिख-लिख कर कलम-स्याही से उसे,
दिल से बहा दूँगा, सोचा


वो सागर सा बसा था दिल में आखिर,
बूंदों से खाली कैसे होता



मैं मोहब्बत मिजाजी लोगों में से हूं 
मेरी नफ़रत भी लाइलाज़ सी है 



सब तेरी मोहब्बत की इनायत है
वरना मैं क्या  मेरा दिल क्या मेरी शायरी क्या


बार बार ढूंढते हैं नोटिफिकेशन तेरे नाम की.
जब तू ही न देखे तो मेरी शायरी किस काम की


उसका बेवजह जाना,उससे नफरत कराता है
उससे बेशुमार इश्क़,सारी नफरत दबाता है


तुम्हारा कहना था के भुला दें तुमको
काम मुश्किल था लेकिन कर दिया हमने


बेधड़क सी, बेबाक सी
बेखौफ सी, बेहिसाब सी
मोहब्बत ये तुम से 
एक आफताब सी
मदमस्त सी, मधुर सी
मनमौजी सी, मधु राग सी
मौहबत ये तुम से
एक महताब सी
अजनबी स  नादान सी
अनकही सी, बेज़ुबान सी
मोहब्बत ये तुम से आज़ान सी
दिलशाद सी, रिवायत सी
आदत सी, कयामत सी
मोहब्बत ये तुम से
एक इबादत सी।
इशक के पार, प्यार से प्यारी
जान से ज़्यादा सबसे न्यारी
मोहब्बत ये तुम से
बस मोहब्बत सी



मैं देखता हूं ख्यालों में तूझे
अंधेरों से लेकर उजालों में तूझे


ढूंढा जिन जवाबो में तूझे 
पा लिया उन सवालों में तूझे


कैसे सबको हक दू तुझपर
सोचता हूं अपने साथ तूझे



हो सके तू भी हौसला रख
कहीं मिल जाऊ किसी दुआ में तूझे



तुमको चंद लफ्जो में लिख आता हूं
बस हर रात तुमसे यूं मिल आता हूं


मोहब्बत रंग दे जाती है 
जब दिल दिल से मिलता है
मगर मुश्किल तो ये है दिल
 बड़ी मुश्किल से मिलता है 



तुम्हारे एक लम्हें पर भी मेरा हक़ नहीं...
ना जाने तुम किस हक़ से मेरे हर लम्हें में शामिल हो..



जो साथ रहकर सवार ना सके,
वो खिलाफ होकर क्या बिगाड़ लेंगे


इश्क़ अगर खाक ना करदे..
तो ख़ाक इश्क  हुआ



मेरे महबूब यूं इश्क में बहाने बनाना छोड़ दे
जाना है तो जा..पर किश्तों में आना छोड़ दे



खुशबू कि तासीर सा
 इश्क  होता है
ज़्यादा "मेहकता" है
जाहिर कम होता है



मोहब्बत की हकीक़त में
 ख़ामोशी आखिरी सच है



प्यार कहो या पागलपन
मोहब्बत कहो या नादानियां
तुम्हारे होने से ही तो है
मेरी शायरी मेरी कहानियां 



ईश्क का ताबीज़ है उसके पास
वो जिसे चाहे दीवाना कर दे 



बहुत बेबाक आंखो में ताल्लुक टिक नहीं पाता
मोहब्बत में कशिश रखने को शर्माना जरूरी है



चलती है दिल के शहर में, यूँ हकुमत उनकी
बस जो भी उसने कह दिया, दस्तूर हो गया



सदियों तलक मेरी मुहब्बत का
जुनून हर जुबां का राज हो 
कुछ ऐसा कर ऐ हमसफ़र की
जमाने को मेरे इश्क पर नाज़ हो
मेरी हर शायरी, हर ग़ज़ल और
हर सुर का तुम ही तो साज हो
हर एक शब्द हो सुनहरे मेरे तुम
तुम ही तो मेरे अल्फाज़  हो














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