Mohabbat Shayari - मोहब्बत शायरी

 Mohabbat Shayari - मोहब्बत शायरी 

आँखें जो खुली तो उन्हे अपने करीब पाया ना था
कभी थे रूह मे शामिल आज उनका साया ना था 






बेपनाह मोहब्बत की जिनसे उम्मीदे लिये बैठे थे
उनसे तन्हाइयों की सौगाते मिलेंगी बताया ना था


एक हम ही कसीदे हुस्न के हर बार पढ़ते रहे पर
उसने तो कभी हाल-ए-दिल सुनाया ना था 


तेरी आरज़ू मेरा ख्वाब है
जिसका रास्ता बहुत खराब है
मेरे ज़ख़्म का अंदाज़ा ना लगा
दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है


आशिकी है मुझसे तो जता देना
लफ्ज़ से छु लूँ तुम्हे तो बता देना 



वैसे तो कोई बात नहीं मुझमें
गर दिखे कोई बात तो बता देना


आ कर ख्यालों में मेरे जहाँ मेरा बेख्याल कर जाती है
हमें भी सिखा दे कोई हुनर वो कैसे ये कमाल कर जाती है



किरदार बनकर लफ्जों मे मेरे कुछ ऐसे समाँ वो जाती है, 
बात जब भी करता हूँ उसकी तो  बात ग़ज़ल बन जाती है


तुम चाँद बनकर रहना हम देखेंगे रात बनकर,
किसी रोज तुम न निकलो ऐसा कभी न करना


तुम चले जाओ जब भी तो देखूं तुम्हारा रास्ता
तुम लौट कर न आओ ऐसा कभी न करना


तुम रूठ जाओ मुझसे, ऐसा कभी न करना,
मैं एक नजर को तरसू, ऐसा कभी न करना




मैं पूछ-पूछ हारूँ, सौ सौ सवाल करके
तुम कुछ जवाब न दो, ऐसा कभी न करना



मुझसे ही मिलकर हंसना
मुझसे ही मिलकर रोना
मुझसे बिछड़कर जी लो
 ऐसा कभी न करना


दूर तो कर दिया हैं
पर अलग कर पाओगे


आसान है क्या ऐसी मोहब्बत करना
जिसके बदले मोहब्बत ना मिले


Mohabbat Shayari in Hindi 

तुमने नाराज होना छोड़ दिया
इतनी नाराजगी भी ठीक नहीं 





इतना आसान नहीं है  मेरे ग़म को समझ पाना
 हम टूटे हुए भी पूरे नज़र आते हैं


मुझको ढूँढोगे तो मेरे निशाँ तक न पाओगे
तुम अपने दिल से पूछ लेना मेरा पता क्या है


मेरे बग़ैर कोई 
तुमको ढूंढता कैसे
तुम्हें पता है, तुम्हारा 
पता रहा हूँ मैं



मरने का रिवाज अब कहाँ मुहब्बत में 
चलो एक दूजे में अमर हो जाते है हम
भले न हो पाए मयस्सर हमे इश्क़
 हमारा एक दूजे के खयाल में खो जाते है हम



हासिल करके तो हर कोई मुहब्बत कर सकता है
बिना हासिल किए किसी को चाहना कोई हमसे पूछे



जिंदगी में एक प्यारी सी ख़ता कीजिये 
 इश्क हो जाये जिससे उसे बता दीजिये,
ना कर सको इक़रार तो बस इतना
 कीजिये जिसे कहते हो आप
उसे बस तुम  कह दीजिये



ताल्लुक़ बरक़रार रखना हो 
तो अच्छाई बयान करते रहो
ख़त्म करना हो तो
 सच्चाई बयान कर दो




मुकर गया है वो चाहतों से
मेरी आदतों को खराब करके



बेशक तुम्हें बेशुमार इश्क़ करते हैं पर
अपने आत्म सम्मान से बढ़कर नहीं



तेरी आँखों में मेरी शायरियाँ हैं
मेरी शायरियों में तेरा चेहरा है



एक बार करके ऐतबार लिख दे कितना है मुझसे प्यार लिख दे l
कटती नहीं ये ज़िन्दगी अब तेरे बिन कितना और करूँ मैं इंतज़ार तू लिख दे



कोई रूह का तलबगार हो तो मोहब्बत हम भी कर लें
दिल तो बहुत मिलें पर दिल से कोई नहीं मिला



कुछ नहीं मिलता चाहे 
जितनी मर्जी वफा कर लो
अगर वक्त वफा ना करें तो
 वफादार भी बेवफा हो जाता है

Mohabbat wali Shayari 


मानी हर बात आँख मूँद जब तक
फ़साना मोहब्बत का चला तब तक 

Mohabbat Shayari 


क्या ख़ूब कहा किसी ने
जिस मुहब्बत का जवाब
 न आये उसे इश्क़ कहते हैं


अपने होठों से मुझको चख तो जरा
मैं भी शायद शराब हो जाऊँ



मुझे खुद पता नहीं रहता कि क्या है 
अब तो आदत हो गयी है इंतज़ार की
कुछ लिपटा सा रहता है बदन से मेरे 
शायद तेरी वो छुअन आखरी बार की




जान देने को कहाँ मैनें
तो हसँ कर बोली 
तुम सलामत रहों
हर रोज मरने के लिए 




गजब का जुल्म ढाया 
उसने हम दोनों के उपर
मुझे भरपुर इश्क 
देकर तुम्हें बेइंतहा
 हुस्न देकर  



छोड़ दो मुड़कर देखना उनको
जो तुमसे दूर जाया करते है
जिनको साथ नहीं चलना होता
वो अक्सर रूठ जाया करते है




महोब्बत हो या इबादत
जो भी है तुमसे ही हैं
नाराज़गी या शरारत
जो भी है तुमसे ही ह
इस दिल पर हुकुमत
बस एक तुम्हारी ही है
इस चहेरे की मुस्कुराहट..
जो भी है तुमसे ही है 
मेरी रूह की राहत...
जो भी है तुमसे ही हैं 



बड़ी तबियत से पूछा उसने
कि कौन हूँ मैं
एक मुस्कान के साथ
हमने भी जवाब दिया
हर लफ्ज़ को तुझसे जोड़कर शायरी कर लूँ 
वो वजह हो तुम




मैं भी तलाश में हूँ 
किसी अपने की
कोई तुम सा तो हो
पर किसी और का ना हो



एक अधूरा ख्याब
मेरी नीम जैसी जिंदगी
 को शहद कर दे
काश कोई मुझे भी 
इतना चाहे कि हद कर दे





इसी कशमकश में 
सारा दिन गुज़र जाता है
उस से बात करूं या उसकी बात करूं.




इश्क़ जिंदा भी छोड़ देता है,
मुरशद
मैं तुम्हे अपनी मिसाल देता हूं


खामोशियाँ कभी भी
 बेवजह नहीं होती,
कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं
 जो आवाज़ छीन लेते हैं
Mohabbat Shayari 






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