Bewafa Shayari-बेवफा शायरी

 Bewafa shayari-बेवफा शायरी 




चला था जिक्र ज़माने  की बेवफाई का 
सो आ गया है  तुम्हारा ख्याल वैसे ही




बेवफाई पे तेरी जी है फिदा 
कहर होता जो बा-वफ़ा  होता


दिल भी तोड़ा तो सलीके से न थोड़ा 
बेवफाई के भी आदाब हुआ करते हैं


हम उसे याद बहुत आएंगे
 जब उसे भी कोई ठुकराएगा


काम आ सकी न अपनी वफाएं तो क्या
करें उस बेवफा को भूल न जाए तो क्या करें


नहीं शिकवा मुझे कुछ बेवफाई का तेरी हरगिज़
 गिला तब हो अगर तू ने किसी से भी निभाई हो


तुम किसी के भी हो नहीं सकते 
तुम को अपना बना कर देख लिया


उड़ गई हूं वफा जमाने से 
कभी गोया किसी में थी ही नही


जाओ भी क्या करोगे मेहर ओ 
वफा बार हो आजमा के देख लिया


ये क्या कि तुम ने जफ़ा  से भी हाथ खींच लिया
 मेरी वफाओं का कुछ तो सिला दिया होता


हम ने खुद को भी पीट डाला 
तुम ने तो सिर्फ बेवफाई की


Bewafa Shayari in Hindi 


आशिकी में बहुत जरूरी है
 बेवफाई कभी-कभी करना

Bewafa shayari


गिला लिखूं मैं अगर तेरी बेवफाई का 
लहू में गर्क सफीना हो आश्रई का


तुम जफ़ा पर भी तो नहीं काएम 
 हम वफा उम्र भर करे  क्यू  कर


जो मेला उसने बेवफाई की 
कुछ अजब रंग है जमाने का



उम्मीद उन से वफ़ा की तो खैर क्या कीजे 
जफा भी करते  नहीं वो कभी  जफा की तरह


वफा की खैर मानता हूं बेवफाई में
 भी मैं उसकी कैद में से रिहाई में भी


वही तो मरकाजी किरदार है कहानी 
का उसी पे खत्म है तासीर बेवफाई की


उस बेवफ़ा से कर के वफ़ा मर मिटा रज़ा
 इक किस्सा ए तवील का ये इख्तिसार है


बे वफ़ा तुम बा वफ़ा मैं देखिए होता है 
क्या गेज़ में आने को तुम हो 
मुझे को प्यार आने को है



ये जफ़ाओ की सज़ा है कि तमाशाई है तू ये 
वफ़ाओ की सज़ा है कि सज़ा है कि पए-दार हू मै


गलत रवी को तिरी मैं गलत समझता हूं 
ये बेवफाई भी शामिल मिरी वफ़ा मैं है


न मुदारात हमारी न अदू से नफ़रत
 न वफ़ा ही तुन्हें आई न जफ़ा ही आई


मुद्दत हुई एक शख्स ने दिल तोड़ दिया था इस 
वास्ते अपना से मोहब्बत नहीं करते साकी फारुकी




Bewafa shayari




देखा तो कोई और था सोचा तो कोई और 
जब आ के मिला और था चाहा तो कोई और 
उस शख्स के चेहरे मैं कई रंग छुपे थे
 चुप था तो कोई और बोला तो कोई और 
दो चार कदम पर ही बदलते हुए देखा 
ठहरा तो कोई और गुजरा तो कोई और 
तुम जान के भी उस को न पहचान सकोगे
अनजाने में वो और और जाना तो वो और 
उलझन में हूं खो दूं कि उसे पा लू करूं क्या
 खोने पे कुछ और पाया तो कुछ और दुश्मन भी है
 हमराज भी अजान भी है वो क्या 
अशक ने समझा उसे वो था तो कोई और


मुद्दत हुई एक शख्स ने दिल तोड़ दिया था
इस वास्ते अपना से मोहब्बत नहीं करते 
साकी फारुकी

हर भूल तेरी माफ की तेरी 
हर खता को भुला दिया 
गम है कि मेरे प्यार का 
बेवफाई सिला दिया


इक अजब  हाल है कि अब 
उस को याद करना भी बेवफाई है


इस कदर मुसलसल थी शिद्दते जुदाई कि 
आज पहली बार उस से मैंने बेवफाई की  
अहमद फ़राज़




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