जौन एलिया

JAUN ELIA



बहुत दिल को कुशादा  कर लिया क्या          बड़ा
जमाने भर से वादा कर लिया क्या
तो क्या सचमुच जुदाई मुझ से कर ली
तो खुद अपने को आधा कर लिया क्या

हुनरमंदी  से अपनी दिल का सफ़्हा
मिरी जा ,तुम ने सादा  कर लिया क्या
 जो यक सर  जा है उस के बदन से
कहो कुछ इस्तिफाड़ा कर लिया क्या        फायदा 
बहुत कतरा रहे हो मुग्बचो  से                  सेवा करने वाले बच्चे 
गुनाह-तर्क -बादा कर लिया क्या
यहां के लोग कब के जा चुके हैं
सफर जाड़ा-ब-ज़ादा कर लिया क्या
उठाया इक कदम तूने न उस तक
 बहुत अपने को मादा कर लिया क्या
तुम अपनी  कज कुलाही  हार बैठी ?
 बदन को बे लाबादा कर लिया क्या
 बहुत नजदीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या


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बेकरारी-सी बेकरारी है
वस्ल है और फ़िराक़ तारी है
जो गुजारी न जा सकी हम से
हम ने वो  जिंदगी गुजारी है
निघरे  क्या हुए लोगों पर
अपना साया भी अब तो भारी है
 बिन तुम्हारे कभी नहीं आयी 
क्या मिरी नींद  भी तुम्हारी है
आप में  कैसे आऊं मैं तुझ बिन
साँस जो चल रही है आरी  है
उससे  कहियों कि दिल की गलियों में
 रात दिन  तेरी इन्तजारी  है

 हिज़्र  हो या विसाल  कुछ हो
 हम हैं और उस की यादगारी है

इक महक सम्ते -दिल से आई थी
यह समझा तिरी सवारी है

हादसों का हिसाब है अपना
वरना हर आन  सब की बारी है
खुश रहे तू जिंदगी अपनी
उम्र भर की उम्मीदवारी है




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कैसा दिल और उस के क्या गम जी
यू  ही बातें बनाते हैं हम जी
क्या भला आस्तीन और दामन
 कब से पलकें भी अब नहीं नम जी 
उस से अब  कोई  बात करना
 खुद से भी बात कीजे कम- कम जी
दिल जो दिल क्या था एक महफ़िल था

अब है दरहम  जी बरहम जी
बात बेतोर  हो गई शायद
जख्म भी अब नहीं मरहम  जी
हार दुनिया से मान ले शायद
दिल हमारे में अब नहीं दम जी
आप से दिल की बात कैसे कहूं
आप ही तो है दिल के मरहम जी है
है ये हसरत की ज़िब्हा  हो जाऊ 
है शिकन उस  शिकम की जालम जी
कैसे आखिर ना रंग खेले हम
 दिल लहू हो रहा है जानम जी
है खराबा  हुसैनिया अपना
 रोज मजलिस है और मातम जी
वक़्त  दम भर का खेल है इसमें 
 बेश-अज़-बेश  है कम-अज़ - कम जी है
 है अज़ल  से अबद  तलक  का हिसाब
और बस पल है पेहम जी
बेशिकन  हो गई हैं वो ज़ुल्फ़े
उस गली में नही रहे खम जी
दश्ते-दिल का ग़ज़ाल ही न रहा
अब भला किस कीजिए रम जी 


















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