John Elia Biography

John Elia Biography

जौन एलिया

जौन एलिया आधुनिक युग के बहुत ही मशहूर शायर हैं हालांकि पिछले एक दशक में उनकी मृत्यु हो गई लेकिन उनकी  शायरी अभी भी आवाम के बीच विशेषकर युवा वर्ग जो फेसबुक /ट्वटिर की दुनिया पर जीती है उसे बुहत  प्रेरित कर रही है एलिया ने पूरी तरह से  हिंदुस्तानी समुदाय के  युवाओं को खासकर प्रभावित किया जौन एलिया को उर्दू साहित्य के प्रति उनके समर्पण के लिए कई पुरस्कार मिले लेकिन जॉन एलिया को दिया गया सबसे उल्लेखनीय पुरस्कार पाकिस्तान सरकार द्वारा 2000 साहित्य के प्रीति योगदान के  लिए राष्ट्रपति पुरस्कार था पाकिस्तान सरकार ने उन्हें लुगत कमेटी का चेयरमैन बनाया था यह वही पद है  जो हिंदुस्तान में उस समय डॉक्टर हरिवंश राय बच्चन का था यह इतना महत्वपूर्ण था कि राष्ट्र की आधिकारिक भाषावली इसी माध्यम से तय होनी थी लेकिन कहीं ना कहीं जौन उस पढ़ाई लिखाई के बंधन  से बाहर आना चाहते थे जौन इस बात को स्वीकार करना चाहते थे कि मैं यह सब बातें जानते हैं वह अपनी प्रतिभा को पारंपारिक पढ़े लिखे शायरों की छवि से बाहर रखना चाहते थे |
मैं जो हूं जॉन एलिया हूं जनाब
 मेरा बेहद लिहाज कीजिएगा
 यह जो उनके कहने की खुद्दारी है मैं एक अलग प्रेम का कवि हूं यह परंपरागत शायरों में बहुत कम ही देखने को मिलती है  | जैसे
साल हा साल और इक लम्हा ,कोई भी तो इसमें बल आया 
खुद ही इक दर पे मैने दस्तक दी ,खुद ही लड़का सा मैं निकल आया 
जौन  पहले से यह कहने का तरीका नहीं देखा गया जौन  खूबसूरत जंगल है जिसमें झर बेरिया हैं कांटे हैं उठती हुई बेतरतीब  झाड़ियां है खिलते हुए बनफूल है बड़े-बड़े देवदारु हैं शीशम है चारों तरफ कूदते हुए हिरन है कई शेर भी हैं मगर मछली हैं उनकी तुलना में आप कैसे कह सकते हैं कि बाकी सब शायर एक उपवन है जिसमें सलीके से बनी हुई और करीने से सजी हुई क्यारियाँ  है इसलिए जॉन की शायरी में प्रवेश करना खतरनाक भी है लेकिन अगर आप थोड़े से एडवेंचर हैं और आप प्रेम से बाहर आकर कुछ करना चाहते हैं तो जौन दुनिया आप लिए हैं|

       जौन एलिया का जन्म 14 दिसंबर 1931 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा में हुआ था   उन्होंने अमरोहा के एक स्थानीय मदरसे में अरबी फारसी का अध्ययन किया और अंग्रेजी हिब्रू के छोटे से ज्ञान में बहुत महारत हासिल की आप अपने भाइयों में सबसे छोटे थे आपके पिता अल्लामा शफीक हसन आलिया कला और साहित्य के क्षेत्र में बहुत काम करते थे और एक शायर और ज्योतिष भी थे जौन एलिया प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही के सबसे छोटे भाई थे दूसरे भाई रईस अमरोहवी  जाने-माने विद्वान और पत्रकार थे दुनिया भर में मशहूर पत्रकार दार्शनिक सैयद मोहम्मद तकी के भाई और जाहिदा हिना के पति थे जिन्होंने प्रसिद्ध स्तंभ लिखा था आप  जौन एलिया खुद पाकिस्तान के प्रसिद्ध अखबार जंक के संपादक थे  जौन एलिया शिया थे  जौन एलिया ने अपने जीवन में अरबी की कई पुस्तकों का उर्दू में अनुवाद किया  लेकिन अपने काम को प्रकाशित करने के लिए आश्वस्त नहीं हो सके उनका पहले का पहला काव्य संग्रह "शैयाद" कब प्रकाशित हुआ जब वह 60 वर्ष के थे उनकी कविता  यानि का दूसरा संग्रह 2003 में मरणोपरांत प्रकाशित हुआ और 2004 में 30 राष्ट्रीय गुमान था जॉन अनुवाद संपादन और अन्य गतिविधियों में भी शामिल थे|

     उर्दू शायरी के गुलशन में हजारों फूलों ने एहसास की  खुशबू पैदा की है जो लोगों के दिलों पर राज करती रही है शायद ही कोई दिन हो जब आम बोलचाल की भाषा में उर्दू शेरो का सहारा ना लिया जाता हो इस गुलशन के फूलों में से एक का नाम जॉन एलिया है जौन एलिया  को शायरों में सबसे ज्यादा पढ़ा और सुना जाने वाला शायर भी कहा जा सकता है भारत पाकिस्तान के बंटवारे के बाद वह पाकिस्तान चले गए लेकिन अपनी जन्मभूमि भारत को कभी नहीं भूले जौन एलिया का एक वाक़िया बहुत मशहूर हुआ जौन एलिया जब पकिस्तान से वापस अपने वतन अमरोहा आये तो अमरोहा रेलवे स्टेशन पर उतर कर उन्होंने अपने वतन से मोहब्बत का इज़हार किया और अपने वतन की खाक को अपने सर पर डाल लिया|















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